प्रिया मिश्रा.....
श्री राम भक्त हनुमान जी के जन्म चइत पुर्णिमा के मंगलबार के दिन चित्रा नक्षत्र आ मेष लग्न के योग में भईल रहे। कहल जाला एह दिन विधि-विधान से महाबीर जी के पुजा आराधना कईला से मनोवांछित फल के प्राप्ति होला। हनुमान जी के उपासना के खातीर एह दिन के बहुत हीं उत्तम मानल गईल बा।
बिष्णु जी के राम अवतार के बाद रावण के दिव्य शक्ति प्रदान होगईल। जेकरा कारण रावण शिव जी से अपना मोक्ष प्राप्ती खातीर वरदान मंगले। तब शिव जी राम के हांथे मोक्ष प्राप्ती खातीर लिला रचनी। शिव जी के लिला अनुसार शिव जी हनुमान के रुप में जन्म लिहनी। ताकी रावण के मोक्ष दिलवा सकीं। एह कार्य में राम जी के साथ देवेला स्वयं महादेव हनुमान जी के रुप में अवतार ले के आईल रहनी। रावण के वरदान के साथ साथ मोक्ष भी शिव जी दिलईनी।
ईन्द्र के वज्र से हनुमान जी के ठुड्डी संस्कृत मे "हनु" टुट गईल रहे। एहिसे उनका के हनुमान के नाव दिहल गईल रहे। एकरा अलावा हनुमान जी अनेकन नाव से प्रसिद्ध बानी। बजरंग बली,मारुती,अंजनी सुत,महाबीर,पवन पुत्र,केसरी नन्दन,संकट मोचन,कपीश,शंकर सुवन आदि।
हनुमान जन्मोत्सव पर लाल वस्त्र बिछा के हनुमान जी के मुर्ती अथवा फोटो के दक्षिण दिशा के तरफ मुह कर के स्थापित करीं। स्वयं लाल आसन पर लाल वस्त्र धारण कर के बईठीं घी के दिया आ चंदन के अगरबत्ती अथवा धुप जलाईं। चमेली के तेल में घोर के नारंगी सेनुर आ चांदी के वर्क चढाईं। एकरा बाद लाल फुल चढा के लड्डु के भोग लगाईं केला के भी भोग लगावल जा सकेला। दिया के नौ बेर घुमा के आरती करीं आ "ॐ मंगलमुर्ती हनुमते नम: मंत्र के जाप करीं। एह लेख के भोजपुरी में १००० शब्द में लिखीं
श्री हनुमान जी के जन्म चैत पूर्णिमा के मंगलमय दिन पर भइल मानल जाला, जे दिन चित्रा नक्षत्र आ मेष लग्न के शुभ संयोग बनल रहे। ई दिन हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानल जाला आ एकर धार्मिक आ आध्यात्मिक महत्व बहुत गहिर बा। जनश्रुति के अनुसार, एह दिन विधि-विधान से महाबीर जी के पूजा-अर्चना करे से भक्तन के मनोवांछित फल के प्राप्ति होला आ जीवन के अनेक कष्ट दूर हो जाला। हनुमान जी के उपासना खातिर ई दिन सबसे उत्तम अवसर मानल जाला।
हनुमान जी के जन्म कथा भगवान श्री राम आ भगवान शिव से गहराई से जुड़ल बा। जब भगवान विष्णु राम अवतार ले के धरती पर अवतरित भइनी आ रावण के वध के लीला रचनी, तब रावण के अत्यधिक शक्ति प्राप्त हो चुकल रहे। रावण शिव जी के परम भक्त रहे आ उनकरा से वरदान पवले रहे, जेकर कारण ऊ बहुत बलवान हो गइल रहे। अंत में रावण शिव जी से मोक्ष प्राप्ति के वरदान मंगले। तब भगवान शिव, भगवान राम के हाथे रावण के मोक्ष दिलावे खातिर एक दिव्य लीला रचनी।
शिव जी के ई लीला अनुसार ऊ स्वयं हनुमान जी के रूप में जन्म लिहनी, ताकि भगवान राम के सहयोग दे सकसु आ रावण के उद्धार हो सके। एह प्रकार हनुमान जी के अवतार के मुख्य उद्देश्य भगवान राम के सेवा आ धर्म के स्थापना रहल। हनुमान जी के जीवन भक्ति, सेवा, शक्ति आ समर्पण के अद्भुत उदाहरण बा।
हनुमान जी के नाम के पीछे भी एक रोचक कथा बा। बचपन में जब हनुमान जी सूर्य के फल समझ के खा जाए के कोशिश कइनी, तब देवराज इंद्र उनकरा पर वज्र से प्रहार कइनी। एह प्रहार से उनकर ठुड्डी (हनु) टूट गइल। संस्कृत में ठुड्डी के “हनु” कहल जाला, एह कारण उनका के “हनुमान” नाम पड़ गइल। एह घटना के बाद देवतागण उनकरा के असीम शक्ति आ वरदान दिहलें।
हनुमान जी अनेक नाम से प्रसिद्ध बानी। उनका के बजरंगबली, मारुति, अंजनी सुत, महाबीर, पवन पुत्र, केसरी नंदन, संकट मोचन, कपीश आ शंकर सुवन आदि नाम से पुकारल जाला। हर नाम के अपना-अपना विशेष अर्थ आ महत्व बा। “संकट मोचन” नाम दर्शावेला कि ऊ अपने भक्तन के हर संकट के दूर करे वाला बाड़न, जबकि “पवन पुत्र” नाम उनकर जन्म के कहानी से जुड़ल बा, काहेकि ऊ वायु देव के आशीर्वाद से जन्म लिहनी।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन पूजा के विशेष महत्व बा। एह दिन भक्त लोग सच्चा मन से व्रत रख के पूजा-अर्चना करेला। पूजा के विधि भी बहुत खास मानल जाला। सबसे पहिले एक साफ-सुथरा स्थान पर लाल वस्त्र बिछावल जाला, काहेकि लाल रंग हनुमान जी के प्रिय मानल जाला। ओकरा बाद हनुमान जी के मूर्ति या फोटो के दक्षिण दिशा के ओर मुख करके स्थापित कइल जाला।
भक्त खुद लाल वस्त्र धारण करके लाल आसन पर बइठेला। पूजा के दौरान घी के दीपक जलावल जाला आ चंदन के अगरबत्ती या धूप से वातावरण के शुद्ध कइल जाला। चमेली के तेल में सिंदूर घोल के हनुमान जी के चढ़ावल जाला, जे बहुत शुभ मानल जाला। चांदी के वर्क आ लाल फूल भी अर्पित कइल जाला।
भोग में लड्डू बहुत प्रिय मानल जाला, खासकर बूंदी के लड्डू। एकरा अलावा केला के भी भोग लगावल जा सकेला। पूजा के अंत में दीपक के नौ बेर घुमाके आरती कइल जाला आ “ॐ मंगलमूर्ति हनुमते नमः” मंत्र के जाप कइल जाला। ई मंत्र अत्यंत शक्तिशाली मानल जाला आ भक्तन के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देला।
हनुमान जी के भक्ति से ना केवल आध्यात्मिक लाभ होला, बल्कि मानसिक शांति आ आत्मविश्वास भी बढ़ेला। ऊ अपने भक्तन के भय, रोग, दुख आ संकट से रक्षा करेलन। हनुमान चालीसा के पाठ भी एह दिन विशेष रूप से कइल जाला, जे बहुत फलदायी मानल जाला।
हनुमान जी के जीवन हमनी के सिखावेला कि सच्ची भक्ति, सेवा भाव आ समर्पण से हर असंभव काम संभव हो सकेला। ऊ कभी अपने शक्ति पर घमंड ना कइनी, बल्कि हर समय भगवान राम के सेवा में लागल रहलें। एह से हमनी के भी सीख लेवे के चाहीं कि जीवन में विनम्रता आ निष्ठा के महत्व का होला।
आज के समय में भी हनुमान जी के पूजा के महत्व कम ना भइल बा। लोग अपना जीवन के कठिनाई दूर करे खातिर उनका के याद करेला। खासकर मंगल आ शनिवार के दिन उनका के पूजा कइल जाला। हनुमान मंदिर में जा के दर्शन करे से मन के शांति मिलेला।
अंत में, हनुमान जन्मोत्सव ना केवल एक पर्व ह, बल्कि भक्ति, शक्ति आ सेवा के प्रतीक भी ह। एह दिन हमनी के हनुमान जी के आदर्श अपनावे के संकल्प लेवे के चाहीं।